मुहर्रम के इस पाक महीने में मुस्लिम भाइयों के चेहरे पर आई रौनक जानिए मुहर्रम में क्या क्या होगा
मोहर्रम के इस पावन पर्व पर बड़े ही हर्षोल्लास से लोग इस त्योहार को मनाते हैं मुस्लिम धर्म के अनुसार मोहर्रम की 1 तारीख के नया वर्ष की शुरुआत होती है 1 मोहर्रम 2023 कहा जाता है मुहर्रम चंद्रमा के आधार अनुसार दिखाई देने के बाद मनाया जाता 2023 के इस वर्तमान वर्ष में मोहर्रम 20 जुलाई दिन बुधवार को मनाया जाएगा 10 दिन तक मुस्लिम धर्म के लोग रोजा रखने का रिवाज है इसके बाद ताजिया निकाला जाता है अलग-अलग राज्यों और गांव में कई प्रकार से जुलूस निकाले जाते हैं जिसमें ढोल नगाड़े और इमाम साहब की सवारी निकाली जाती है!
मुहर्रम में रहते हैं उपवास उर्फ रोजा
पैगंबर मोहम्मद साहब के समय में बहुत ही बड़ा महत्व माना जाता कहां जाता है मुहर्रम का बहुत ही खास महीना होता है लोगों का कहना है कि पूरे रोजा रखना अनिवार्य है तभी सवाब मिलता है पर हम आपको बता दें ऐसा कुछ भी नहीं है इस महीने में जितने चाहे उतने रोजे आप रख सकते हैं मोहर्रम के महीने में एक खास बात होती है कि हमेशा उसमें औरतों और लड़कियों से दूर रहना पड़ता है घर से कोई भी तालुकात नहीं होने चाहिए बिना चप्पल जूते के रहना पड़ता है खास बात यह है कि इसमें सबसे ज्यादा छुआछूत से बचना पड़ता है मोहर्रम के इस महीने में सभी मुस्लिम भाइयों को रोजा रखना अनिवार्य है यह सवाब का काम होता है! मुस्लिम भाई बड़े ही धूमधाम से इस त्योहार को मनाते हैं!
मोहर्रम के महीने के बारे में जानिए
ऐसे कई मुस्लिम भाई कर्बला में जो हुई घटना के बारे में अशुभ या बुरा मानते हैं आप इस तरह के ख्यालात अपने दिमाग से निकाल दे हम आपको बता दें यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी मुहर्रम अल्लाह का पावन महीना है अल्लाह का यह पावन महीना बुरा और अशुभ कैसे हो सकता है हुसैन के जंग में हुई शहादत का दिन अहसुरा था! मुहर्रम में शादी विवाह और निकाह नहीं करना चाहिए यह सबसे बड़ी गलत बात है आप लोग गुमराह होने से बचिऐ!
मुहर्रम के दिन के बारे में जानिए
मोहर्रम के उपवास एवं रोजा की बात करें मुहर्रम में 10 रोजा रहना पड़ता है जिसमें दसवें दिन ताजिया एवं जुलूस निकाला जाता है भारत में ऐसे कई जगह दसवें दिन के पहले अलाव खेला जाता है उर्दू तारीख 7,8,9 को अलाव खेला जाता है हर जगह का अलाव इन्हीं 3 तारीख के अंदर होता है ना कभी इन तारीख के बाद ना कभी इन तारीख के पहले होता है!
- मुहर्रम का जो पहला रोजा होता है उस दिन अल्लाह ने पैगंबर आदम अलैहिस्सलाम को पैदा किया था यह रोजा मोहर्रम की 1 तारीख को रखा जाता है
- मुहर्रम के दूसरे स्थान पर आते हैं पैगंबर इब्राहिम मोहर्रम की 10 तारीख को इनका जन्म हुआ था
- मोहर्रम के इस दिन के अनुसार पैगंबर आदम अलैहिस्सलाम अल्लाह से तौबा कुबूल की थी
- मुहर्रम का दसवां दिन शुक्रवार का दिन कयामत का होता है
- जब भी कोई भी मुस्लिम व्यक्ति मुहर्रम के दिन नहाता है आखिरी तारीख उर्दू की 10 तारीख को उसे दुनिया की कोई भी बीमारी पकड़ नहीं सकती
- जो भी मुस्लिम भाई मोहर्रम के छठ में रोजे के दिन आंखों में काजल लगाता है उसे दुनिया का कोई भी रोक नहीं लग सकता है
- मुहर्रम के सातवें दिन या आखरी दिन खास तरह का खाना बनाकर लोगों में बैठता है यह एक सुन्नत होती है!



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